अपने जिले में भी एक राधे मां -जो भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने का दावा करती हैं

यह कोई धर्मस्थल नहीं, पर हर सोमवार, शुक्रवार और विशेष तिथियों पर दरबार सजता है। बीमारियों और तथाकथित भूत-प्रेत के साए से निजात की आस में सैकड़ों की भीड़ जुट रही है।
चार खंभों पर पड़ी पक्की छत के नीचे लाल चुनरी के घेरे के बीच बने मंच से खुद पर देवी आने का दावा करने वाली पूर्व शिक्षामित्र सुभद्रा इन्हें दर्शन देती हैं।
यहां पहुंचते ही पीड़ित स्त्री-पुरुष झूमने लगते हैं। चिकित्सक इसे साफ-साफ ढकोसला व अंधविश्वास बता रहे हैं।

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