सवर्ण आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल – मोदी सरकार को तगड़ा झटका

नई दिल्ली ■ सवर्ण जाति में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों और उच्च शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। एक एनजीओ ने संशोधित बिल को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जनहित याचिका में कहा गया है कि ये संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है और आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
संविधान के खिलाफ हो रही आरक्षण देने की कोशिश
यूथ फॉर इक्वालिटी नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक को चुनौती दे डाली है। एनजीओ की याचिका में कहा गया है कि खुद सुप्रीम कोर्ट ने पहले से ही यह तय कर दिया था कि देश में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। तो ऐसे में संविधान संशोधन के जरिए इसे 60 फीसदी करना संविधान का उल्लघंन है। कोर्ट से अपील की गई है कि इस बिल को गैर संवैधानिक घोषित किया जाए। याचिका में ये भी कहा गया है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने ये फैसला वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया है।

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