क्या… पुलवामा में अर्धसैनिक बलों पर हुए हमले को रोका जा सकता था

देवरिया लाइव ■ जम्मू कश्मीर कि खुफिया विभाग का मानना है कि पुलवामा में अर्धसैनिक बलों पर हुए वीभत्स हमले को रोका जा सकता था । एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के हवाले से यह जानकारी मिली है कि पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को 12 फरवरी से हाई अलर्ट पर रखा गया था तथा आशंका भी जताई गई थी जैश ए मोहम्मद सैन्य बलों पर बड़े हमले की तैयारी में है। अगर स्टेट इंटेलिजेंस की जानकारियों को नई दिल्ली के साथ पहले ही साझा किया जाता तो 14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले को रोका जा सकता था, साफ तौर पर सुरक्षा में एक बड़ी चूक हुई है। यह हमला इतना खतरनाक था कि इसकी चपेट में आई एक बस लोहे और रबड़ के ढेर में बदल गई, इस बस में कम से कम सीआरपीएफ के 44 जवान सवार थे। प्रशासन का कहना है कि यह काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, इन जवानों को आगामी संसद और विधानसभा चुनाव से पहले श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर जिलों में तैनात किया जाना था, जान गंवाने वाले शहीदों में अधिकतर पूर्वी भारत के रहने वाले थे ।

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