फर्जी शिक्षक मामले में बीएसए कार्यालय पहुंची एसटीएफ टीम

देवरिया लाईव ■ शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े की जांच कर रही गोरखपुर एसटीएफ की टीम गुरुवार को बीएसए कार्यालय धमक पड़ी। पांच सदस्यीय टीम ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने के शक में चिह्नित 44 शिक्षकों से जुड़ी पत्रावलियां तलब की। वर्ष 2010 से अब तक हुई नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दोनों चर्चित बाबुओं के शहर से बाहर रहने के चलते टीम को रिकॉर्ड नहीं मिला। प्रभारी बीएसए के कक्ष में करीब आधे घंटे तक बैठकर इस बारे में पूछताछ के बाद टीम जल्द वापस आने की बात कह लौट गई। एसटीएफ टीम आने की सूचना से कार्यालय के कर्मचारी सहमे रहे। बड़ी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। दिन में करीब ढाई बजे बीएसए कार्यालय पहुंची एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम सीधे बीएसए कक्ष में गई। वहां पैन कार्ड और आधार नंबर में फेरबदल करने वाले 34 और फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाने में की शिकायत वाले 10 शिक्षकों से जुड़े सभी अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा।

बताया गया कि वर्ष 2010 से अब तक हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लिपिक प्रीतम सिंह और जयशंकर श्रीवास्तव जिले से बाहर हैं। रिकॉर्ड उन्हीं के पास रखे गए हैं। कमरों में ताला लगा है और चाभी उन्हीं के पास है। टीम ने करीब आधे घंटे तक प्रभारी बीएसए विनोद त्रिपाठी से पूछताछ कर जानकारी ली। इसके बाद दोनों लिपिकों के उपस्थित होने पर रिकॉर्ड के लिए जल्द आने की बात कह लौट गई। एसटीएफ गोरखपुर के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि फिलहाल 44 शिक्षकों की भर्ती से जुड़े अभिलेख की तलाश में टीम बीएसए कार्यालय पहुंची थी। लिपिक के नहीं होने से कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाया, जल्द ही फिर आएंगे। पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

यह है मामला

प्रदेश के कई जिलों में फर्जीवडाड़े की पोल खुलने के बाद बाद योगी सरकार ने इसकी जांच एसटीएफ को सौंप दी है। एसटीएफ ने फर्जी शिक्षकों और उनके सरगनाओं पर शिकंजा कसना शुरू किया तो मंडल के कई जिलों में फर्जी शिक्षकों के नौकरी करने की जानकारी मिली। इस मामले में देवरिया पहले से ही शासन की रडार पर रहा है। सिद्धार्थनगर से पकड़े गए 36 फर्जी शिक्षकों में भी मास्टर माइंड समेत कई देवरिया के ही हैं। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक देवरिया में परिषदीय एवं एडेड स्कूलों में शिक्षक भर्ती में व्यापक फर्जीवाड़ा हुआ है। शुरुआत में 34 शिक्षक चिह्नित किए गए थे, जिनकी संख्या अब 44 हो गई है। टीम इनसे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने में जुटी है। अंदेशा है कि पड़ताल में यह संख्या अभी और बढ़ सकती है।

कर्मचारियों में तरह-तरह की होती रही चर्चाएं

एसटीएफ के जाने के बाद कार्यालय कर्मचारियों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। कई कर्मचारी फर्जीवाड़े का जिक्र करते हुए इसमें संलिप्त लोगों के नपने का अंदेशा जताते रहे। कई तो यह भी कहते सुने गए कि एक ना एक दिन तो यह होना ही था। जो भी गलत काम करेगा, उसे कानून के पंजे में आना ही पड़ेगा। चर्चा यह भी थी कि दोनों बाबुओं को एसटीएफ के आने की पहले ही भनक लग गई थी। यही कारण था कि वह पहले ही लखनऊ या इलाहाबाद जाने की बात कह निकल गए। अगर वह मौके पर रहते तो टीम उन्हें पूछताछ के लिए साथ भी ले जा सकती थी।

कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के जांच के सिलसिले में एसटीएफ टीम गुरुवार की दोपहर कार्यालय में आई थी। जिन प्रमाण पत्रों की वह मांग कर रहे थे, उनसे संबंधित बाबुओं के शहर के बाहर रहने के कारण उनको रिकॉॅर्ड नहीं उपलब्ध कराया जा सका। – विनोद त्रिपाठी, प्रभारी बीएसए

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