फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे सात शिक्षक बर्खास्त

देवरिया। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे सात शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। कार्रवाई की जद में आए शिक्षकों में पांच महिला शिक्षक हैं। शिक्षा निदेशक का पत्र प्राप्त होने के बाद बीएसए ने गुरुवार को यह आदेश जारी किया। संबंधित शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से अब तक दिए गए वेतन भुगतान की रिकवरी और केस दर्ज कराने के लिए संबंधित बीईओ को निर्देशित किया गया है।

परिषदीय स्कूलों में 2009-2010 में तैनात 11 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों पर संदेह जताते हुए वर्ष 2014 में शिकायत राज्यपाल से की गई थी। करीब पांच वर्षों तक चली जांच के दौरान आरोपी शिक्षकों ने जांच प्रभावित करने भी का प्रयास किया। सत्यापन के लिए कई बार पत्र जारी करने के बावजूद अभिलेखों की मूल प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने अपने स्तर से जांच शुरू कराई तो छह शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी होने की पुष्टि हुई। बीते 25 अप्रैल को शिक्षा निदेशक ने एडी बेसिक की जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी छह शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त करते हुए उन्हें दिए गए वेतन की रिकवरी का आदेश दिया था।

दस दिनों तक मामला फाइलों में ही दबा रहा, मगर जब एक दैनिक अख़बार ने उजागर किया तो अफसर हरकत में आए। आनन-फानन में निदेशालय ने एडी बेसिक व बीएसए को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए। बुधवार की शाम पत्र प्राप्ति के बाद बीएसए ने गुरुवार को नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी किया। इसके अलावा बैतालपुर ब्लॉक में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात स्वाति तिवारी के भी दस्तावेज फर्जी होने की शिकायत मिली थी। जांच में इसकी भी पुष्टि होने पर उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। बीएसए ओमप्रकाश यादव ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत की जांच के बाद सात शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। निदेशक के निर्देशानुसार सातों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। प्रथम नियुक्ति तिथि से अब तक किए गए वेतन भुगतान की रिकवरी का भी आदेश दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित बीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह इन शिक्षकों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराएं।

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